मंजू देवी यादव

This poem is dedicated to first female Coolie from India – Manju Devi Yadav.

ख्वाइशों के दरमियाँ
मुश्किलों का फाँसला है
टूटती हर शाख़ को
तेरे मन का हौंसला है

हाथ को काठ कर
बुझती रूह को जलाती है तू
टिमटिमाते हैं जो चाँद तेरे
चाँदनी में नहाती है तू

विहान की रेशम ओढ़े
फिर निकल पड़ती है
ये कौनसा सफ़र है
जलती है पर बुझती नहीं
आँधियो से चिराग़ बचाती है तू

जहां टपकती है बूँद तेरे पसीने की
उस हर ज़मीं को
पाक कर जाती है तू

संदीप व्यास
जून १३, २०१८

Pic Courtesy – https://www.hindustantimes.com/photos/india-news/photos-manju-devi-is-the-first-woman-coolie-at-jaipur-railway-station/photo-qmxybAcor3rO2jF8WsBSgP.html

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